रत्न पहनने से पहले रखें इन बातों का ध्यान -मनीष साईं

रत्न पहनने से पहले रखें इन बातों का ध्यान -मनीष साईं

▪ रत्न की उम्र के बारे में जाने।
▪ रत्न कहां से खरीदना है इस की परख कैसे करना है यह भी जाने।

विश्व प्रसिद्ध वास्तु ज्योतिष एवं तंत्र गुरु डॉ. मनीष साईं जी के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का बहुत महत्व है। यदि किसी व्यक्ति का कोई ग्रह कमजोर होता है,किसी ग्रह के कारण व्यक्ति का जीवन तमाम परेशानियों से घिर जाता है तो ऐसे में रत्न चिकित्सा बहुत लाभकारी और उपयोगी साबित होती है। ज्योतिष शास्त्र में रत्न पहनने के पूर्व कई निर्देश दिए गए हैं।रत्नों में मुख्यतः नौ ही रत्न ज्यादा पहने जाते हैं।सूर्य के लिए माणिक, चन्द्र के लिए मोती, मंगल के लिए मूंगा, बुध के लिए पन्ना, गुरु के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा, शनि के लिए नीलम, राहु के लिए गोमेद और केतु के लिए लहसुनियां। रत्नों के उपरत्न भी बहुत महत्व रखते हैं कोई व्यक्ति महंगे रत्न नहीं खरीद सकता तो वह उपरत्न खरीद सकता है।यह जरूर जानने योग्य बात है कि उपरत्न की पावर बहुत कम होती है वह बहुत कम असर कारक होते हैं। रत्नों का आपके जीवन पर कैसा असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रत्न कैसे कब पहने।

गुरु मनीष साईं के अनुसार जब आप रत्न धारण करते हैं तो किन बातों का विशेष ख्याल रखें, ताकि रत्न आपको शुभ फल प्रदान करें।रत्न कब बदलें, क्या रत्नों को दूध में डालकर रखना चाहिए या नहीं आदि जैसे कई सवालों के जवाब यहां दिए जा रहे हैं। कई ज्योतिषी पंचामृत में रत्न को डुबोकर पहनने की सलाह देते हैं लेकिन इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

▪रत्न पहनते समय क्या करें और क्या ना करें-

रत्न धारण करने से 1 घंटा पूर्व गंगाजल में रत्न को डाल दे। किसी भी रत्न को दूध में ना डालें। अंगूठी को गंगाजल से निकालने के पश्चात स्वच्छ जल से एक बार धोकर पहनें। रत्न को दूध में डालकर रात भर ना रखें। कई रत्न दूध को सोख लेते हैं और दूध के कण रत्नों में समा कर रत्न को विकृत कर देते हैं। अपने मन की संतुष्टि के लिए अपने ईष्ट देवी की मूर्ति से स्पर्श करा कर रत्न धारण कर सकते हैं।

▪रत्न धारण करने का समय पंचांग अनुसार-

यह देख लें कि कहीं 4, 9 और 14 तिथि तो नहीं है। इन तारीखों को रत्न धारण नहीं करना चाहिए।
यह भी ध्यान रखें कि जिस दिन रत्न धारण करें उस दिन गोचर का चंद्रमा आपकी राशि से 4,8,12 में ना हो। अमावस्या, ग्रहण और संक्रान्ति के दिन भी रत्न धारण ना करें।

▪रत्न धारण करने का शुभ स्थान-

रत्न हमेशा दोपहर से पहले सुबह सूर्य की ओर मुख करके धारण करना चाहिए। वैसे रत्न ब्रह्म मुहूर्त में धारण करें तो बहुत लाभ होता है।

▪रत्न धारण करें का उचित समय-

गुरुदेव मनीष साईं जी के अनुसार मोति, मूंगा जो समुद्र से उत्पन्न रत्न हैं, यदि रेवती, अश्विनी, रोहिणी, चित्रा, स्वाति और विशाखा नक्षत्र में धारण करें तो विशेष शुभ माना जाता है। सुहागिन महिलाएं रोहिणी, पुनर्वसु, पुष्य नक्षत्र में रत्न धारण ना करें. ये रेवती, अश्विनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा नक्षत्र में रत्न धारण करें, तो विशेष लाभ होता है।

▪रत्न कब बदलें एवं रत्नों की उम्र-

गुरुदेव मनीष साई जी के अनुसार ग्रहों के 9 रत्नों में से मूंगा और मोति को छोड़कर बाकी बहुमूल्य रत्न कभी बूढ़े नहीं होते हैं। मोती की चमक कम होने पर और मूंगा में खरोंच पड़ जाए तो उसे बदल देना चाहिए। वैसे माणिक और पुखराज की उम्र एक बार सिद्ध कर धारण करने पर चार-चार वर्ष की होती है। गोमेद लहसुनिया और मूंगे की उम्र तीन-तीन वर्ष होती है। हीरा 7 वर्ष और नीलम 5 वर्ष की उम्र तक फल देते हैं। इसके पश्चात आप इस रत्न को पहने रहना चाहते हैं तो पुनः मंत्र जाप कर इसे सिद्ध करवाएं और धारण कर ले। यह पहले की तरह ही फल देना शुरू कर देगा। माणिक्य, पन्ना, पुखराज, नीलम और हीरा सदा के लिए होते हैं। इनमें रगड़, खरोच का विशेष असर नहीं होता है। इन्हें बदलने की जरूरत नहीं होती है। यदि रत्न चटक जाए यानी टूट जाए तो जरूर बदलना चाहिए। ज्योतिष के जानकार लोगों को लूटने खसोटने के लिए जल्दी रक्त बदलने की सलाह दे देते हैं क्योंकि रत्न में उन्हें कमीशन मिलता है।

▪किस धातु में रत्न धारण करें -
गुरुदेव मनीष साईं जी के अनुसार पुखराज पन्ना सोने में धारण करें नीलम चांदी या पंच धातु में धारण करें हीरा प्लेटिनम में धारण करें और सस्ते रत्न जैसे मोति, मूंगा और उपरत्न चांदी या सस्ती धातु में धारण कर सकते हैं।

▪रत्न कहां से और किससे खरीदें-

गुरुदेव मनीष साईं जी के अनुसार रत्न हमेशा जानकार व्यक्ति से खरीदना चाहिए जोकि लेबोरेटरी से जांच किया हुआ प्रमाण पत्र सहित आपको रत्न विक्रय करें। भारत में रत्न परीक्षण की एक ही लेबोरेटरी मान्य है जो कि जयपुर और अहमदाबाद में स्थित है। बाकी रत्न जांच की लेबोरेटरी है वह झूठे प्रमाण पत्र प्रस्तुत करती हैं। रत्न की परख हीलिंग क्षेत्र में कार्य करने वाले तथा प्राण ऊर्जा एवं रेकी के ग्रैंडमास्टर से भी करवा सकते हैं।

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