अंबानी की तरह सुख देता है महाभाग्य योग, जाने आपकी कुंडली में यह योग तो नहीं -मनीष साईं

अंबानी की तरह सुख देता है महाभाग्य योग, जाने आपकी कुंडली में यह योग तो नहीं -मनीष साईं

महाभाग्य योग राजयोग से भी बड़ा योग है। जब भी हम किसी पैसे वाले का नाम लेते हैं तो सबसे पहले हमारे दिमाग में देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी का का नाम सामने आता है। आप जानते हैं मुकेश अंबानी की कुंडली में महाभाग्य योग है। यह योग बहुत से जातकों की कुंडली में होता है लेकिन कुछ रुकावट के कारण वह इस योग का लाभ नहीं ले पाते। आइए जानते हैं कैसे बनता है महाभाग्य योग।

विश्व प्रसिद्ध वास्तु,ज्योतिष एवं तंत्र गुरु श्री मनीष साईं जी के अनुसार यदि किसी पुरुष का जन्म दिन के समय का हो तथा उसकी जन्म कुंडली में लग्न अर्थात पहला घर, सूर्य तथा चन्द्रमा, तीनों ही विषम राशियों जैसे कि मेष, मिथुन, सिंह आदि में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में महाभाग्य योग बनता है। यदि किसी स्त्री का जन्म रात के समय का हो तथा उसकी जन्म कुंडली में लग्न, सूर्य तथा चन्द्रमा तीनों ही सम राशियों अर्थात वृष, कर्क, कन्या आदि में स्थित हों तो ऐसी स्त्री की कुंडली में महाभाग्य योग बनता है। इसके शुभ प्रभाव से व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि, सरकार में कोई शक्तिशाली पद, प्रभुत्व, प्रसिद्धि तथा लोकप्रियता आदि जैसे शुभ फल मिलते है।

श्री मनीष साईं जी के अनुसार महाभाग्य योग जातक-जातिकाओ की कुंडलियो में एक समान नियमो से ही होता है लेकिन महाभाग्य योग के लिए ये नियम पुरुष और स्त्री जातक- जातिकाओ के लिए विपरीत है।इस योग का स्त्री और पुरुष जातक-जातिकाओ की कुंडली में विपरीत योगो से बनने का कारण यह है कि सूर्य दिन में प्रबल रहने वाला पुरुष ग्रह है और चंद्रमा रात्रि में प्रबल रहने वाला एक स्त्री ग्रह है।
गुरुदेव श्री मनीष साईं जी के अनुसार महाभाग्य योग का फल केवल ऊपर बताये गए नियमो से पूर्णतः निश्चित कर लेना ही उचित नही है।किसी कुंडली में इस योग का निर्माण तथा फलादेश तब पूर्ण रूप से लागु होता है जब सूर्य तथा चंद्रमा दोनों शुभ स्थिति में हो इन दोनों में से किसी एक ग्रह के अशुभ होने पर महाभाग्य योग या तो बनेगा ही नही या इस योग का शुभ प्रभाव सूर्य चंद्र के अशुभ होने के कारण बहुत कम हो जायेगा जिस कारण जातक या जातिका को इस योग का अधिक लाभ प्राप्त नही हो पायेगा। इसके अतिरिक्त कुंडली में सूर्य और चंद्रमा के बल तथा स्थिति का परिक्षण करना भी आवश्यक है क्योंकि इनके अनुकूल या प्रतिकूल होने से भी महाभाग्य योग के शुभ फलो पर बहुत प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के तोर पर, पुरुष जातको की जन्म कुंडली में सूर्य के मेष राशि में स्थित होने से बनने वाला महाभाग्य योग सूर्य के अन्य विषम राशियो में बनने वाले महाभाग्य योग से अधिक बलशाली होगा क्योंकि मेष में सूर्य उच्च के होकर अधिक बलशाली हो जाते है।इसी तरह स्त्री जातिकाओ की कुंडली में चंद्रमा के वृष राशि में स्थित होने से बनने वाले महाभाग्य योग चंद्रमा के अन्य सम राशियो में बनने वाले महाभाग्य योग से अधिक बलशाली होगा क्योंकि चंद्रमा वृष राशि में उच्च के हो होकर अधिक बलशाली हो जाते है। गुरुदेव मनीष साईं के अनुसार इसके अतिरिक्त कुंडली में सूर्य और चंद्रमा की विभिन्न भावो में स्थिति तथा कुंडली में सूर्य और चंद्र पर पड़ने वाले अन्य शुभ- अशुभ ग्रहों के प्रभावो का परिक्षण करना भी आवश्यक होता है।कुंडली में अन्य जितने शुभ योग होंगे इस योग का शुभ प्रभाव उतना अधिक ओर बड़ जाता है।

▪महाभाग्य योग होने पर यदि रुकावट है तो यह उपाय करें-

▪ प्रतिदिन सूर्य उपासना करें।
▪ प्रतिदिन श्री सुक्तम का पाठ करें।
▪ गौ सेवा करें।
▪ बुजुर्गों की सेवा करें।

▪ पक्षियों को प्रतिदिन दाना डालें।

इन 5 उपायों से महाभाग्य योग में यदि कोई रुकावट है तो वह खत्म होती है।

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