अमावस्या योग के कारण कहीं आप मानसिक रोग के शिकार तो नहीं -मनीष साईं

अमावस्या योग के कारण कहीं आप मानसिक रोग के शिकार तो नहीं -मनीष साईं

जब सूर्य और चन्द्रमा दोनों कुण्डली के एक ही घर में विराजित हो जावे तब इस दोष का निर्माण होता है। जैसे की आप सब जानते है की अमावस्या को चन्द्रमा किसी को दिखाई नही देता उसका प्रभाव क्षीण हो जाता है। ठीक उसी प्रकार किसी जातक की कुंडली में यह दोष बन रहा हो तो उसका चन्द्रमा प्रभावशाली नही रहता। चंद्रमा के प्रभावशील नहीं होने के कारण मन से संबंधित बीमारियां उत्पन्न होती है। विश्व प्रसिद्ध वास्तु,ज्योतिष एवं तंत्र गुरु श्री मनीष साईं जी के अनुसार चन्द्रमा को ज्योतिष में कुण्डली का प्राण माना जाता है और जब चन्द्रमा ही प्रभाव हीन हो जाए तो यह किसी भी जातक के लिए कष्टकारी हो जाता है क्योंकि यही हमारे मन और मस्तिक्ष का करक ग्रह है। इसलिए अमावस्या दोष को बहुत बुरे योगो में से एक माना है, जिसकी व्याख्या ज्योतिष शास्त्र में बड़े विस्तार से की है तथा उसके उपाय बताये है। ज्योतिष में ऐसा माना जाता है कि सूर्य और चन्द्र दो भिन्न तत्व के ग्रह है सूर्य अग्नि तत्व और चन्द्र जल तत्त्व, इस प्रकार जब दोनों मिल जाते है तो वाष्प बन जाती है कुछ भी शेष नही रह जाता। श्री मनीष साईं जी के अनुसार आइए जानते हैं यदि अमावस्या योग बना है तो उसके उपाय क्या है।

◾उपाय-

सूर्य और चंद्र की युति बनने पर जब अमावस्या योग बनता है तो चंद्रमा ग्रह के उपाय करने चाहिए जैसे कि-

▪ अमावस्या दोष के जातकों को पक्षियों को चावल या सफ़ेद ज्वार डालना चाहिए ।अमावस्या दोष होने पर जातक को सफ़ेद वस्तु का दान करना चाहिए।

▪अमावस्या दोष के जातक को चाँदी के गोल लाकेट पर चंद्रमा बनवाकर गले मे धारण करना चाहिए।

▪यदि जिस भी जातक की जन्मकुंडली में अमावस्या दोष बन रहा हो और कुन्डली मे चंद्रमा लग्नेश का मित्र हो या शुभ भाव का स्वामी हो व् नीच राशि या 6-8-12 भाव मे ना हो तो चंद्रमा को बलवान बनाने के लिए मोती पहने।यदि जिस भी जातक की जन्मकुंडली में अमावस्या दोष बन रहा हो और कुन्डली मे चंद्रमा कमजोर होकर 6- 8-12 भाव का स्वामी हो या नीच राशि पर हो तो उसे मोती नहीं पहनना चाहिए।

▪प्रतिदिन माता के पैर छूकर आशीर्वाद लें।

▪ भगवान शिव की भक्ति करें। सोमवार का व्रत करें।

▪ पानी या दूध को साफ पात्र में सिरहाने रखकर सोएं और सुबह कीकर के वृक्ष की जड़ में डाल दें।

▪चावल, सफेद वस्त्र, शंख, वंशपात्र, सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, चीनी, बैल, दही और मोती दान करना चाहिए।

▪ दो मोती या दो चांदी के टुकड़े लेकर एक टुकड़ा पानी में बहा दें तथा दूसरे को अपने पास रखें।

▪कुंडली के छठे भाव में चन्द्र हो तो दूध या पानी का दान करना मना है।

▪ सोमवार को सफेद वस्तु जैसे दही, चीनी, चावल, सफेद वस्त्र,1 जोड़ा जनेऊ, दक्षिणा के साथ दान करना और ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ का 108 बार नित्य जाप करना श्रेयस्कर होता है।

▪ यदि सूर्य एवं चन्द्र की युति 12 वे भाव हो तो धर्मात्मा या साधु को भोजन न कराएं और न ही दूध पिलाएं।

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