सटीक ज्योतिष गणना से पता चलता है व्यक्ति की उम्र कितनी है, अल्पायु से बचने के करें यह उपाय,- मनीष साईं

मनीष साई ज्योतिष, वास्तु और तंत्र गुरु
कुछ लोग जो भारतीय धर्म एवं प्राचीन शास्त्रों में विश्वास नहीं रखते हैं, वह इस बात पर हंसी उड़ाते हैं कि वास्तु,ज्योतिष एवं तंत्र सब कहने और सुनने की बातें हैं,यह सब कुछ फर्जी है।कुछ लोग तो ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से मृत्यु तक की जानकारी बता देते हैं मतलब वह ईश्वर से भी बड़े हैं, ऐसा मैंने कई लोगों से के मुंह से सुना है,खासकर विज्ञान से ताल्लुक रखने वालों से। लेकिन ऐसे लोगों को मैं बताना चाहता हूं अच्छा ज्योतिषी जो होता है अगर वह सटीक गणना करें तो निश्चित तौर पर बता सकता है कि व्यक्ति की आयु कितनी है। क्या कभी आपके मन में ये सवाल उठा है की आपको ईश्वर ने कितना जीवन दिया है ? क्या आप ये जानते हैं की आप कब तक जिएंगे ? तो चलिए हम आपको बताते हैं की किस प्रकार ज्योतिष द्वारा मृत्यु का कारण व सटीक जीवन अवधि का निर्णय किया जा सकता है। ज्योतिषशास्त्र की मान्यतानुसार व्यक्ति की आयु का निर्णय गर्भ में ही हो जाता है। शास्त्रों में वैदिक ज्योतिष में जीवन अवधि के कठिन विषय पर व्यापक चिंतन किया गया है।

ज्योतिष अनुसार अल्पायु योग

छोटी उम्र में मृत्यु हो जाना यानी 20 से 32 वर्ष की आयु को अल्पायु कहा गया है। हमारे विद्वानों का मत है कि वृषभ, तुला, मकर व कुंभ लग्न वाले जातक अल्पायु होते हैं, लेकिन इन लग्न वाले जातकों की कुंडली में यदि अन्य कोई शुभ ग्रह हो और सूर्य मजबूत स्थिति में हो तो इस योग का प्रभाव नहीं रहता। यदि लग्नेश चर-मेष, कर्क, तुला, मकर राशि में हो तथा अष्टमेश द्विस्वभाव- मिथुन, कन्या, धनु, मीन राशि में हो तो अल्पायु योग होता है। यदि जन्म लग्नेश सूर्य का शत्रु हो तो जातक अल्पायु होता है। इसी प्रकार यदि शनि और चंद्रमा दोनों स्थिर राशि में हों अथवा एक चर और दूसरा द्विस्वभाव में हो तो व्यक्ति की मृत्यु 20 से 32 की आयु के मध्य होती है। ज्योतिषी गणना में अल्पायु के बारे में बताया गया है तो साथ में उसके उपाय भी विस्तृत बताए गए हैं मेरा 25 वर्षो का अनुभव है इस अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि यह उपाय करने से अल्पायु के योग टलते हैं। वैसे तो प्रारब्ध के हिसाब से भी व्यक्ति की आयु तय होती है लेकिन अच्छे कर्म व ईश्वर की भक्ति तथा मानव सेवा से सब कुछ बदला जा सकता है।

अल्पायु से बचने के उपाय

  • अल्पायु योग टालने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई उपाय बताए गए हैं। अच्छे कर्म एवं मानव सेवा के साथ दीन दुखियों की मदद करने से लोगों की दुआओं के असर से व्यक्ति बुरे से बुरे योग को टाल सकता है कुछ उपाय में बता रहा हूं यह करें शत प्रतिशत लाभ होगा।
  • प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
  • प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र की 10 माला का जाप करें।
  • प्रत्येक गुरुवार को वृद्धा आश्रम जाएं, बुजुर्गों की सेवा करें, माता पिता का अपमान बिल्कुल न करें, दिन की शुरुआत माता पिता के आशीर्वाद के साथ करें।
  • प्रत्येक गुरुवार को अपनी क्षमता अनुसार बुजुर्गों को भोजन दान करें।
  • प्रत्येक सोमवार अपनी क्षमता अनुसार 1 वर्ष से 5 वर्ष की आयु तक के बच्चों को दूध का दान करें।
  • प्रत्येक माह की दोनों पत्नियों को भगवान शिव का दही से अभिषेक करें।
  • अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को टालने के लिए कालों के काल महाकाल की पूजा अर्चना किया हुआ नवग्रह दीर्घायु पेंडल धारण करें।
    सप्त चक्र दीर्घायु यंत्र के नीचे अपना फोटो रखें।
  • सोमवार का व्रत करें और अपने हिस्से का भोजन किसी गरीब को दान दें।
  • ॐ चंद्रमोली देवाय नमः मंत्र की एक माला पूर्णिमा एवम अमावस्या को किसी भगवान शिव के सिद्ध मंदिर में या कालों के काल महाकाल के चित्र के समक्ष बैठकर करें, पहले स्वच्छ जल जिसमें काला तिल एवं गंगाजल मिला हो वह भगवान को अर्पित करें तथा सफेद फूल अर्पित करें उसके पश्चात यह मंत्र जाप करें।
  • प्रतिदिन पीपल के वृक्ष की तीन परिक्रमा करें।

यदि आपके जीवन में किसी भी तरह की परेशानी है तो उसका कारण ज्योतिष, वास्तु एवं तंत्र संबंधी हो सकता है ।विश्व के जाने माने ज्योतिष वास्तु एवं तंत्र गुरु श्री मनीष साईं जी से आप परामर्श प्राप्त कर सकते हैं आप वास्तु की विजिट अपने शहर में करवा सकते हैं 20 लाख लोगों के जीवन में श्री मनीष साईं जी के परामर्श से परिवर्तन आया है।आप भी इस परिवर्तन का हिस्सा बन सकते हैं।

हमारा पता है
साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन
156 सहयोग विहार शाहपुरा थाने के पास भोपाल मध्य प्रदेश
संपर्क -9617950498,9425150498
Whatsapp no.7000632297
🚩सबका भला हो सब सुख पाए🚩

Leave a Comment