चंद्रमा के खराब होने से होने वाला नुकसान और उससे बचने के उपाय

मनीष साईं,वास्तु,ज्योतिष एवं तंत्र गुरु

वैसे तो चन्द्र देव का स्वभाव स्वभाव बहुत शांत और ठंडा होता है और यही वजह है कि वो हम सभी को शीतलता प्रदान करते है किन्तु जब वे गुस्से में आते है तो उसके परिणाम बहुत भयंकर और विनाशकारी हो सकते है। इसलिए कभी भी चन्द्र देव को कुपित ना होने दें और अगर वे कभी आपसे रुष्ट हो भी जाएँ तो आप तुरंत कुछ उपायों को अपनाकर उन्हें जल्दी से प्रसन्न कर लें।आज हम चन्द्र देव से जुडी कुछ ऐसी बातें बताने वाले है जिन्हें जानकार आप पता लगा सकते हो कि चन्द्र देव आपसे रुष्ट है या नहीं और अगर है तो उन्हें किस तरह मनाया जा सकता है। देखने में आया है कि चंद्र देव के रुष्ट होने से मानसिक रोग बहुत होते हैं। आज मैं आपको चंद्र के रुष्ट होने पर क्या-क्या होता है इसके बारे में बताने जा रहा हूं यह पढ़कर आप आकलन कर सकते हैं कि कहीं आप के साथ तो ऐसा नहीं हो रहा।

◾कुपित चन्द्रमा के संकेत –

▪मानसिक परेशानी- चंद्रमा के रुष्ट होते ही जो पहला संकेत सामने आता है वो है मानसिक चिंता व परेशानी, ऐसे में जातक खुद को फंसा फंसा महसूस करता है, उसे समझ नहीं आता कि वो अपनी समस्याओं से कैसे बाहर निकलें।

▪माता से दूर होना-जातक की माता भी उससे रुष्ट हो जाती है और वो अपनी माँ के सुख की कमी महसूस करता है।कहने का अर्थ ये है कि उसके और उसकी माता के बीच का रिश्ता पहले जैसा नहीं रहता।

▪बायीं आँख में कमजोरी-अगर किसी व्यक्ति की बायीं आँख अचानक कमजोर हो जाती है तो उन्हें समझ जाना चाहियें कि उनकी कुंडली में चन्द्रमा रुष्ट हो चुके है।

आँखों के पास कालापन- यहीं नहीं जातक की आँखों के पास कालापन भी दिखने लगता है जो उसके बुरे समय और थकान को दर्शाता है।
▪छाती में मलगम जमना- सुनने में तो ये आपको सामान्य सा लक्षण लगता है किन्तु जब अगर आप बाकी संकेतों के साथ इसे देखा जाए तो ये पुष्टि करता है कि हाँ सच में चन्द्रमा कुपित हो चुके है. यहीं नहीं उन्हें अन्य वात रोग भी अपना शिकार बना लेते है।

◾ कुंडली में चन्द्रमा के रुष्ट होने के संकेत और उपाय-

▪पुराने दिनों का स्मरण-क्योकि चन्द्रमा के गुस्सा होने पर जातक का बुरा समय आरम्भ हो जाता है इसलिए उसे बार बार अपने पुराने दिन स्मरण होते रहते है।

▪ अधिक नींद आना- ऐसे में जातक खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना थका लेता है कि उसे नींद आने लग जाती है और वो बिस्तर पर पड़ा रहता है।

▪मासिक धर्म में अनियमितता -अगर किसी महिला पर चन्द्र रुष्ट होते है तो उनके माहवारी चक्र में अनियमितता होनी शुरू हो जाती है।

▪बालों का सफ़ेद होना- कहा जाता है कि चिंता करने से बाल सफ़ेद होते है जबकि बालों के सफ़ेद होने के पीछे भी चन्द्र देव का ही हाथ होता है।

▪सिर दर्द -जातक को धीरे धीरे अन्य बीमारियाँ अपना शिकार बना लेती है और उनमे सबसे पहले आता है साइनस।

▪जल का असंतुलन-इसके अलावा जातक के अंदर जल का अभाव व असंतुलन बना रहता है, उसकी त्वचा शुष्क हो जाती है, वो खुद को कमजोर महसूस करने लगता है। इस स्थिति में कुछ लोग तो जल्दी जल्दी पानी पीना आरम्भ कर देते है।

▪शरीर में कैल्शियम की कमी – चंद्रमा के खराब होने पर पानी के साथ साथ पीड़ित के शरीर का कैल्शियम भी लगातार कम होता जाता है और उसके शरीर से दुर्गन्ध भी आने लगती है।

◾शरीर के तत्व अनुसार रुष्ट चंद्रमा को मनाएं

▪अग्नि तत्व -अगर चन्द्रमा अग्नि तत्व में होने पर कुपित होता है तो जातक को सोमवार के व्रत रखने के साथ साथ चंद्रा की हवन सामग्री से हवन अवश्य कराना चाहियें।

▪वायु तत्व – वहीँ वायु तत्व में नाराज होने पर आपको चन्द्रमा के सामान को जमीन में दबा देना चाहियें। अगर आप ये ना कर सकें तो आप चन्द्रमा की अंगूठी को अवश्य पहनें।

▪ जल तत्व – अगर चन्द्र जल तत्व में रुष्ट है तो आपको सोमवार के दिन कच्चे चावल लेने है और उन्हें बहते पानी में प्रवाहित करना है।इसके अलावा आप किसी महिला को चन्द्रमा का सामान भी अवश्य दें।

▪पृथ्वी तत्व – पृथ्वी तत्व में चन्द्र के गुस्सा होने पर आपको “ ॐ श्राम् श्रीं श्रोम् सः चंद्रमसे नमः ” मंत्र का जाप करना है, ध्यान रहें कि मंत्र जाप रात को या शिवजी की पूजा के वक़्त ही करें।

◾खराब /नाराज चंद्र के दोष का ऐसे करें निवारण-

▪प्रथम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- वट बृक्ष की जड़ में पानी डालें।
2:- चारपाई के चारो पायो पर चांदी की कीले लगाएं।
3:-शरीर पर चांदी धारण करें।
4:-व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए। रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से बचना चाहिए।
5:-पूर्णिमा के दिन शिव जी को खीर का भोग लगाएं।
▪द्वितीय भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- मकान की नीव में चॉदी दबाएं।
2:- माता का आशीर्वाद लें।
▪तृतीय भाव में स्थित चन्द्रमा का उपाय-
1:- चांदी का कडा धारण करें।
2: पानी ,दूध, चावल का दान करे़ं।
▪चतुर्थ भाव में स्थित चन्द्रमा का उपाय-
1:- चांदी, चावल व दूध का कारोबार न करें।
2:- माता से चांदी लेकर अपने पास रखे व माता से आशिर्वाद लें।
3:-घर में किसी भी स्थान पर पानी का जमाव न होनें पाए।
▪पंचम भाव में स्थित चन्दमा के उपाय-
1:- ब्रह्मचर्य का पालन करें।
2:- बेईमानी और लालच ना करें, झूठ बोलने से परहेज करें।
3:-11 सोमवार नियमित रूप से 9 कन्यावों को खीर का प्रसाद दें।
4:- सोमवार को सफेद कपडे में चावल, मिशरी बांधकर बहते पानी में प्रवाहित करें।
▪छठे भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- श्मशान में पानी की टंकी या हैण्डपम्प लगवाएं।
2:- चांदी का चोकोर टुकडा़ अपने पास रखें।
3:- रात के समय दूध ना पीयें।
4:- माता-सास की सेवा करें।
▪सप्तम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- पानी और दूध का व्यापार न करें।
2:- माता को दुख ना पहुचाएं।
▪अष्टम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-

1) श्मशान के नल से पानी लाकर घर मे रखें।
2) छल-कपट से परहेज करें।
3) बडे़-बूढो का आशीर्वाद लेते रहें।
4) श्राद्ध पर्व मनाते रहे।
5) कुएं के उपर मकान न बनाएं।
6) मन्दिर में चने की दाल चढाएं।
7) व्यभिचार से दूर रहे।
▪नवम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- धर्म स्थान में दूध और चावल का दान करें।
2:- मन्दिर में दर्शन करने हर रोज जाएं।
3:-बुजुर्ग स्त्रियों से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
▪दशम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- रात के समय दूध का सेवन न करें।
2:- मुफ्त में दवाई बांटें।
3:- समुद्र, वर्षा या नदी का पानी घर में रखें।
▪एकादश भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- भैरव मन्दिर में दूध चढाएं।
2:- सोने की सलाई गरम करके उसको दूध में ठण्डा करके उस दूध को पिएं।
3:- दूध का दान करें।
▪द्वादश भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- वर्षा का पानी घर में रखें।
2:- धर्म स्थान या मन्दिर में नियमित सर झुकाए।
◾खराब /नाराज चंद्र के दोष का ऐसे करें निवारण-
▪प्रथम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- वट बृक्ष की जड़ में पानी डालें।
2:- चारपाई के चारो पायो पर चांदी की कीले लगाएं।
3:-शरीर पर चांदी धारण करें।
4:-व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए। रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से बचना चाहिए।
5:-पूर्णिमा के दिन शिव जी को खीर का भोग लगाएं।
▪द्वितीय भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- मकान की नीव में चॉदी दबाएं।
2:- माता का आशीर्वाद लें।
▪तृतीय भाव में स्थित चन्द्रमा का उपाय-
1:- चांदी का कडा धारण करें।
2: पानी ,दूध, चावल का दान करे़ं।
▪चतुर्थ भाव में स्थित चन्द्रमा का उपाय-
1:- चांदी, चावल व दूध का कारोबार न करें।
2:- माता से चांदी लेकर अपने पास रखे व माता से आशिर्वाद लें।
3:-घर में किसी भी स्थान पर पानी का जमाव न होनें पाए।
▪पंचम भाव में स्थित चन्दमा के उपाय-
1:- ब्रह्मचर्य का पालन करें।
2:- बेईमानी और लालच ना करें, झूठ बोलने से परहेज करें।
3:-11 सोमवार नियमित रूप से 9 कन्यावों को खीर का प्रसाद दें।
4:- सोमवार को सफेद कपडे में चावल, मिशरी बांधकर बहते पानी में प्रवाहित करें।

▪छठे भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- श्मशान में पानी की टंकी या हैण्डपम्प लगवाएं।
2:- चांदी का चोकोर टुकडा़ अपने पास रखें।
3:- रात के समय दूध ना पीयें।
4:- माता-सास की सेवा करें।
▪सप्तम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- पानी और दूध का व्यापार न करें।
2:- माता को दुख ना पहुचाएं।
▪अष्टम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1) श्मशान के नल से पानी लाकर घर मे रखें।
2) छल-कपट से परहेज करें।
3) बडे़-बूढो का आशीर्वाद लेते रहें।
4) श्राद्ध पर्व मनाते रहे।
5) कुएं के उपर मकान न बनाएं।
6) मन्दिर में चने की दाल चढाएं।
7) व्यभिचार से दूर रहे।
▪नवम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- धर्म स्थान में दूध और चावल का दान करें।
2:- मन्दिर में दर्शन करने हर रोज जाएं।
3:-बुजुर्ग स्त्रियों से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
▪दशम भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- रात के समय दूध का सेवन न करें।
2:- मुफ्त में दवाई बांटें।
3:- समुद्र, वर्षा या नदी का पानी घर में रखें।
▪एकादश भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- भैरव मन्दिर में दूध चढाएं।
2:- सोने की सलाई गरम करके उसको दूध में ठण्डा करके उस दूध को पिएं।
3:- दूध का दान करें।
▪द्वादश भाव में स्थित चन्द्रमा के उपाय-
1:- वर्षा का पानी घर में रखें।
2:- धर्म स्थान या मन्दिर में नियमित सर झुकाए।

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