होटल का वास्तु

◼◼होटल का वास्तु◼◼

🚩🚩यदि आपका होटल नहीं चल रहा है या कोई ना कोई परेशानी है, तो जानिए होटल से संबंधित वास्तु टिप्स : मनीष साईं

होटल बनाने में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, लेकिन होटल नहीं चलता है तो उस होटल के मालिक का जीवन तो प्रभावित होता ही है। साथ ही वहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।घर निर्माण, दूकान निर्माण, होटल निर्माण इत्यादि किसी एक व्यक्ति के भविष्य से नही जुड़ा होता, इसका इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति इसके वास्तु से प्रभावित होता है।साथ ही इनके निर्माण में काफी धन भी व्यय होता है तो हर व्यक्ति यही चाहेगा कि उनके होटल का निर्माण सही वास्तु सिद्धांतों से हो, ताकि उनका होटल दिन दोगुनी और रात चौगुनी उन्नति करे और उन्हें भविष्य में भी किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।वास्तु के सिद्धांत ना सिर्फ बाहरी ग्रह नक्षत्रों से होटल की रक्षा करता है बल्कि इसके सिद्धांत होटल के अतिथियों के आराम व सुविधा, कर्मचारी के लिए लाभ और मालिक के मान सम्मान व उन्नति में भी सहायक होते है। इस महत्वपूर्ण लेख के जरिए हम जानते है कि होटल के निर्माण के वक़्त किन वास्तु सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहियें।

◼वास्तु अनुसार आप होटल का मुख्य द्वार ईशान उत्तर पूर्व की तरफ बनवाएं। अगर इस दिशा में कोई अड़चन या आपत्ति हो तो आप उत्तर दिशा या पूर्व दिशा का चुनाव कर सकते है। मुख्य द्वार बहुत आकर्षक होना चाहिए।

◼होटल या रेस्टोरेंट में तस्वीरें लगाते वक़्त आप इस बात का ध्यान रखें कि आप किसी डूबता जहाज, डूबता सूरज, युद्ध, हिंसक जानवर इत्यादि जैसी तस्वीरे ना लगायें।

◼होटल या रेस्टोरेन्ट निर्माण के लिये भूमि आयताकार या वर्गाकार होनी चाहिये, भूमि का कोई भी हिस्सा कटा हुआ नहीं होना चाहिए।

◼ भूमिगत जल स्त्रोत उतर पूर्व मे होना चाहीये। बोरिंग, और पानी का जो भी कार्य करना है वह उत्तर-पूर्व में करें तो उचित होगा।

◼ निर्मित भवन का नेत्रेत्य कौण सबसें उन्नत होणा चाहियें। यहां शयनकक्ष और भोजनकक्ष भी बन सकता है।

◼ पानी का ढलान उतर पूर्व कि और होना चाहिये , उत्तर पूर्व में सेप्टिक टैंक बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

◼ रसोई घर होटल / रेस्टोरेन्ट का सबसे अहम भाग है ,इसे भवन के आग्नेय कोण मे होना चाहिए। इसे वायव्य कोण में भी बनाया जा सकता है ,परन्तु इस दिशा मे अग्नि भय अर्थात आग ,करंट आदि दुर्घटनाओं क अंदेशा रहता है।

◼रसोई की स्लेब यानि प्लेटफॉर्म दक्षिण पुर्व मे रहे और शैफ का मुह पूर्व दिशा मे रहे किचन के स्टाफ की ड्रेस हमेशा सफेद होना चाहिए।

◼होटल या रेस्टोरेंट के फ्रीज को आग्नेय, दक्षिण व पश्चिम दिशा में लगायें। वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र मानता है कि फ्रीज को नैत्रत्य या ईशान कोण में रखने से वो अधिकतर खराब ही रहता है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की संख्या पर पड़ता है।

◼भारी वस्तुओं का स्टोर भूखंड के दक्षिण पश्चिम कोने मे होना चाहिये, यह स्थान हमेशा भारी होना चाहिए।

◼ भवन का उतर पूर्वी भाग अधिक खुला होना चाहिये, और यहां सफाई पूर्ण रूप से होना चाहिए।

◼उतर पूर्वी भाग में छोटे-छोटे पोधों कि क्यारिया ,झरना ,फवारा आदि जल स्त्रोत लाभदायक होते है , बड़े-बड़े वृक्ष दक्षीण व पश्चिम दिशा मे होना श्रेष्कर होता है।

◼ गेस्ट रूम उतर पश्चिम ‘वायव्य कोण ‘ की तरफ़ होना चाहिये।

◼ होटल के रूम में सिरहाना दक्षिण दिशा की तरफ़ होना चाहिए, रूम ऐसे बनाएं के वहां रुकने वाले कस्टमर का पेड़ दक्षिण दिशा की ओर ना हो।

◼ होटल के रूम में टीवी और म्यूजिक सिस्टम अग्नेय कोण की और रखे जाने चाहिये।

◼ पार्किंग पूर्व ,ईशान उतर या वायव्य की तरफ़ होनी चाहिये ।

◼ओवरहेड पानी का टैंक नेत्रेत्य कोंन मे होणा चाहिये।

◼ डाईनिंग हॉल पश्चिम दिशा मे तथा बार व केसिनो दक्षिण दिशा मे होना चाहिये।

◼स्विमिंग पूल पूर्व ईशान या उतरी भाग में होना चाहिए। इसे कभी भी नेत्रत्य आग्नेय व वायव्य कौण में नहीं बनाए।

◼ हमेशा होटल एवं रेस्टोरेंट के बीच के हिस्से में कोई बड़ा निर्माण ना करें यह ब्रहम स्थान होता है यहां निर्माण करने से नकारात्मक उर्जा हमेशा बनी रहती है।

◼ रिसेप्शन व कैश काउंटर मे व्यक्ति को उत्तराभिमुख होकर बैठना चाहिए।

◼टॉयलेट वायव्य कोण( उत्तर-पश्चिम )में बनाना श्रेष्ट होता है।

◼एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस पूर्व दिशा मे बनाये।

◼मालिक व डायरेक्टर का ऑफिस दक्षिण पश्चिम मे बनाना उचित है।

◼जनरेटर ,मेन स्विच बिजली उपकरण ac आग्नेय कोन मे रखना चाहिए।

◼ म्यूजिक थीम की लाइटिंग फाउंटेन ईशान या उतरी दिशा मे होने चाहियें जिससे अधिक से अधिक सकरात्मक उर्ज़ा का संचार हो सके ।

◼◼ यदि आपका होटल या रेस्टोरेंट काफी धन खर्च करने के बावजूद सकारात्मक रिजल्ट नहीं दे रहा है? पैसा आपका बर्बाद हो रहा है? ब्लॉक हो गया है? कर्जा बढ़ गया है? कर्मचारी बार-बार छोड़ कर जा रहे हैं? मानसिक तनाव से आप घिरे हुए हैं ? तो आप परम पूज्य गुरुदेव श्री मनीष साईं जी से परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। उनकी वास्तु विजिट करवा सकते हैं 2500000 लोगों के जीवन में श्री मनीष साईं जी के परामर्श से बदलाव आया है। विश्व के सबसे अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ है तथा ज्योतिष एवं तंत्र-मंत्र में भी उन्हें महारत हासिल है राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त भारत के इकलौते वास्तु विशेषज्ञ हैं।
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साईं अन्नपूर्णा सोशल फाउंडेशन (चैरिटेबल ट्रस्ट)
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