जीवन में परेशानियों का कारण घर में बना किचन तो नहीं मनीष साईं-

🚩🚩कहीं आपका किचन अग्निकोण कोण से बाहर तो नहीं? आज ही जांचें, नहीं तो हो सकता है जीवन बर्बाद- मनीष साईं

जब भी हम वास्तु की बात करते हैं तो कुछ लोग यह कह कर टाल देते हैं कि यह सब भ्रम का मायाजाल है। ऐसे लोग मूर्ख होते हैं,क्योंकि जो व्यक्ति हवा और पानी के सिद्धांत को नहीं समझ पाता वह जीवन में हमेशा दुखी रहता है।आजकल वास्तु के संबंध में लोगों में काफ़ी भ्रम एवं असमंजस की स्थिति है।जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।वास्तु शास्त्र का मूल आधार भूमि, जल, वायु एवं प्रकाश है, जो जीवन के लिए अति आवश्यक है।इनमें असंतुलन होने से नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होना स्वाभाविक है। उदाहरण के द्वारा इसे और स्पष्ट किया जा सकता है- सड़क पर बायें ही क्यों चलते हैं, क्योंकि सड़क की बायीं ओर चलना आवागमन का एक सरल नियम है।नियम का उल्लंघन होने पर दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह वास्तु के नियमों का पालन न करने पर व्यक्ति विशेष का स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि उसके रिश्ते पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वास्तु में रसोईघर के कुछ निर्धारित स्थान दिए गए हैं, इसलिए हमें किचन वहीं पर बनाना चाहिए। यदि आपका किचन अग्नि कोण में नहीं है तो वह आपके जीवन को बर्बाद कर सकता है आप समझ भी नहीं पाएंगे कि आप परेशानियों से क्यों घिरे हुए हैं और दिन प्रतिदिन कुछ न कुछ जीवन में घटित होता रहेगा।

🔹🔹किचन की ग़लत दिशा से बढ़ सकती हैं मुश्किलें-

▪ यदि किचन नैऋत्य कोण में हो तो यहां रहने वाले हमेशा बीमार रहते हैं।

▪यदि घर में अग्नि वायव्य कोण में हो तो यहां रहने वालों का अक्सर झगड़ा होता रहता है. मन में शांति की कमी आती है और कई प्रकार की  परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

▪ यदि अग्नि उत्तर दिशा में हो तो यहां रहने वालों को धन हानि होती है।

▪ यदि अग्नि ईशान कोण में हो तो बीमारी और झगड़े अधिक होते हैं. साथ ही धन हानि और वंश वृद्धि में भी कमी होती है।

▪यदि घर में अग्नि मध्य भाग में हो तो यहां रहने वालों को हर प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

▪ यदि किचन से कुआं सटा हुआ होे तो गृहस्वामिनी चंचल स्वभाव की होगी।अत्यधिक कार्य के बोझ से वह हमेशा थकी-मांदी रहेगी।
🔹🔹घर में किचन किस स्थान पर होना चाहिए?-

▪ किचन हमेशा आग्नेय कोण में ही होना चाहिए।

▪ किचन के लिए दक्षिण-पूर्व क्षेत्र सर्वोत्तम रहता है. वैसे यह उत्तर-पश्‍चिम में भी बनाया जा सकता है।

▪यदि घर में अग्नि आग्नेय कोण में हो तो यहां रहने वाले कभी भी बीमार नहीं होते। ये लोग हमेशा सुखी जीवन व्यतीत करते हैं।

▪ यदि भवन में अग्नि पूर्व दिशा में हो तो यहां रहने वालों का ज़्यादा नुक़सान नहीं होता है।

▪ किचन हमेशा आग्नेय कोण, पूर्व दिशा में होना चाहिए या फिर इन दोनों के मध्य में होना चाहिए. वैसे तो किचन के लिए उत्तम दिशा आग्नेय ही  है।

🔹🔹किचन में क्या करें, क्या न करें?

▪उत्तर-पश्‍चिम की ओर किचन का स्टोर रूम, फ्रिज और बर्तन आदि रखने की जगह बनाएं।

▪ किचन के दक्षिण-पश्‍चिम भाग में गेहूं, आटा, चावल आदि अनाज रखें।

▪ किचन के बीचोंबीच कभी भी गैस, चूल्हा आदि नहीं जलाएं और न ही रखें।
भूकंप
▪ कभी भी उत्तर दिशा की तरफ़ मुख करके खाना नहीं पकाना चाहिए. स़िर्फ थोड़े दिनों की बात है, ऐसा मान कर किसी भी हालत में उत्तर दिशा में चूल्हा  रखकर खाना न पकाएं।

▪भोजन कक्ष (डाइनिंग रूम) हमेशा पूर्व या पश्‍चिम में हो. भोजन कक्ष दक्षिण दिशा में बनाने से बचना चाहिए।

🔹🔹यदि किचन गलत बना है तो उसे कैसे बिना तोड़-फोड़ के ठीक करें जानिए-

यदि आपका किचन आग्नेय कोण में नहीं है गलत दिशा में बना है तो आपके जीवन में बहुत सारी परेशानियां आ सकती है रिलेशन करियर स्वास्थ्य धन यश और प्रसिद्धि इन सभी महत्वपूर्ण जीवन से जुड़े पहलुओं पर इसका दुष्परिणाम हो सकता है। मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूं कि यदि आपका किचन गलत स्थान पर बना है तो उसे कैसे ठीक किया जाए बिना तोड़-फोड़ कर।

▪ दिशा संतुलन ग्रिड किचन में रखें और इसके नीचे परिवार के सभी सदस्यों का फोटो रखें।

▪ किचन में रॉक क्रिस्टल बॉल लाइट के नीचे बांधे।

▪यदि आप नॉन-वेज नहीं खाते हैं तो गेट के सामने हनुमान जी का चित्र लगाएं।

▪ किचन में प्रतिदिन नमक के पानी का पोछा लगाएं।

▪ रात्रि को बर्तन बिल्कुल झूठे ना रखें।

▪ किचन में घर की ग्रहणी खाना बनाएं।

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